पेयजल स्त्रोतों की स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान #kangralive

February 4th, 2017 | Post by :- kangralive | 182 Views

धर्मशाला : पीलिया, दूषित जल एवं दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से होता है तथा थोड़ी सी सतर्कता एवं सावधानी से इस रोग से बचा जा सकता है। हमारे जीवन में जल के महत्व एवं अनिवार्यता के दृष्टिगत हमारी सेहत के लिए जल का स्वच्छ एवं शुद्ध होना जरूरी है। दूषित जल एवं दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से पीलिया जैसे रोग होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए आवश्यक है कि पीलिया रोग से बचाव के लिए आस-पास के परिवेश, पानी की टंकियों तथा जल स्त्रोतों को साफ-सुथरा रखा जाए। थोड़ी सी सावधानी एवं सतर्कता से इस रोग से बचा जा सकता है।
पीलिया के लक्षण
जिला कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पीलिया रोग के लक्षणों के बारे में बताते हैं कि पीलिया रोग में पीड़ित को आंखों के सफेद भाग का पीला होना, बुखार रहना व भूख न लगना, जी मितलाना और कभी-कभी उल्टियां होना, पीला पेशाब आना, चिकनाई वाले भोजन से अरूचि, अत्यधिक कमजोरी व थकान महसूस होना तथा पेट के ऊपरी दाएं भाग में भारीपन या दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
उन्होंने बताया कि ए व ई प्रकार के पीलिया और नॉन ए एवं नॉन बी तरह के पीलिया के संक्रमण के तीन से छः सप्ताह के बाद तथा बी प्रकार के पीलिया (वायरल हैपेटाइटिस) के रोग की छूत के 6 सप्ताह के बाद ही रोग के लक्षण प्रकट होते हैं।
वास्तव में जोन्डिस या वायरल हैपेटाइटिस ई को लोग पीलिया के नाम से ही जानते हैं। यह रोग बहुत ही सूक्ष्म विषाणु से होता है। शुरू में रोगी को इस के लक्षण दिखाई नहीं देते किन्तु जब यह उग्र रूप धारण कर लेता है तो रोगी की आंखे, नाखून, चेहरा एवं शरीर पीला दिखाई देने लगता है, जिसे लोग पीलिया कहते हैं। पीलिया तीन प्रकार का होता है – हैपेटाइटिस ए और ई, हैपेटाइटिस बी तथा हैपेटाइटिस सी। यह रोग अधिकतर ऐसे स्थानों पर होता है जहां व्यक्तिगत और वातावरणीय सफाई का ध्यान न रखा जाए, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी यह ज्यादा होता है। हैपेटाइटिस बी किसी भी मौसम में हो सकता है।
रोकथाम एवं सावधानियां
पीलिया रोग से बचाव के लिए डॉक्टर लोगों को सुझाव देते है कि वे पेयजल को कम से कम 15-20 मिनट तक उबाल कर पीएं, मीठे पदार्थों का सेवन करें एवं खाद्य पदार्थों को ढककर रखें। खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धोेएं एवं शौचालय का प्रयोग करें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें तथा यह ध्यान रखे कि कूड़ा-कर्कट इधर-उधर न फैले तथा पीलिया के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करें।
    क्या न करें
मुख्य चिकित्सा अधिकारी लोगों से आग्रह करते हुए कहते है कि वे बावड़ी के पानी तथा गले-सड़े या कटे फल और सब्जियांे का सेवन न करें, पानी के स्त्रोत दूषित न करें, खुले में शौच न करें। पीलिया होने पर चिकनाई युक्त भोजन न करें, भारी काम न करें, शराब का सेवन न करें। पीलिया झड़वाने के लिए झाड़-फंूक में समय न गंवाएं।